रेल परियोजना के लिए 1.40 लाख पेड़ों पर चलेगी आरी, MP में घने जंगलों से गुजरेगा महू-खंडवा रेल मार्ग

रेलवे की ऐतिहासिक छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदला जा रहा है. 156 किमी लंबी बड़ी लाइन बिछाई जा रही है. पहले छोटी लाइन 118 किमी थी. काम 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है.

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पेड़ काटने की केंद्र सरकार ने दी मंजूरी, कटाई अक्टूबर से शुरू होगी.

मध्य प्रदेश में रेलवे की महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना का मार्ग प्रशस्त करने के लिए घने जंगलों से होकर गुजरने वाले एक मार्गखंड में करीब 1.40 लाख पेड़ काटे जाने को केंद्र सरकार ने कुछ शर्तों के साथ अंतिम मंजूरी दे दी है और कटाई मॉनसून का मौसम बीतने के बाद शुरू होगी. अधिकारियों ने बताया कि इस अहम परियोजना के तहत रेलवे की ऐतिहासिक छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदला जा रहा है.

वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) लाल सुधाकर सिंह ने बताया कि महू-खंडवा रेल लाइन (Mhow-Khandwa Rail Line) के गेज परिवर्तन की परियोजना के लिए इंदौर और खरगोन जिलों के वन क्षेत्रों में करीब 1.40 लाख पेड़ काटे जाएंगे. डीएफओ के मुताबिक इनमें इंदौर जिले के लगभग 1.24 लाख पेड़ शामिल हैं.

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रेल और वन विभाग बना रहे योजना

उन्होंने बताया कि हमें केंद्र सरकार से पेड़ कटाई की अंतिम अनुमति मिल चुकी है. हालांकि, कटाई का काम मानसून का मौसम बीतने पर अक्टूबर से शुरू होगा. जिस वन क्षेत्र में रेलवे का काम शुरू होगा, उसी क्रम में वहां पेड़ों की कटाई की जाएगी और इसके लिए रेलवे तथा वन विभाग मिलकर योजना तैयार कर रहे हैं.

रेलवे को शर्त में लगाने होंगे पौधे

डीएफओ ने बताया कि वन विभाग ने महू-खंडवा रेल परियोजना के लिए रेलवे पर हरित गलियारा प्रबंधन योजना लागू करने की शर्त भी लगाई है. इस शर्त के तहत रेलवे को पटरियों के किनारे स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने होंगे और परियोजना क्षेत्र के भीतर एवं इसके आस-पास उपलब्ध खाली भूमि पर भी पौधरोपण करना होगा.

डीएफओ ने बताया कि शर्त के तहत रेलवे को पटरियों के पास वर्षा जल संचयन के ढांचे विकसित करने होंगे और परियोजना के संचालन में ऊर्जा दक्षता के उपाय भी अपनाने होंगे. हरित रेलवे गलियारा प्रबंधन योजना लागू होने से पर्यावरण संरक्षण के साथ ही वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद मिलेगी. इस योजना का खर्च रेलवे द्वारा उठाया जाएगा और वन विभाग इनकी निगरानी करेगा.

कितना वन परिक्षेत्र प्रभावित हो रहा?

उन्होंने कहा कि वन विभाग ने पेड़ों की कटाई से वन्य जीवन, मिट्टी और नमी पर होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने की योजना अपने स्तर पर बनाई है. अधिकारियों ने बताया कि महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना के महू-सनावद खंड में इंदौर जिले का 404 हेक्टेयर और खरगोन जिले का 46 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हो रहा है.

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दोगुना पौधे रोपने होंगे

पेड़ कटाई से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए इसके दोगुने क्षेत्र में पौधे रोपे जाएंगे. अधिकारियों के अनुसार, इंदौर जिले में पौधारोपण के लिए सीमित जमीन उपलब्ध है, इसलिए धार और झाबुआ जिलों के वन मंडलों में 916 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधे रोपे जाएंगे. हर हेक्टेयर में 1,000 पौधे रोपे जाएंगे.

156 किमी लंबी बड़ी लाइन बिछाई जा रही

अधिकारियों ने बताया कि महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना के तहत 156 किलोमीटर लंबी बड़ी रेल लाइन बिछाई जा रही है, जबकि देश की आजादी से पहले रियासत काल में बिछाई गई छोटी लाइन की लंबाई 118 किलोमीटर थी. उन्होंने बताया कि गेज परिवर्तन परियोजना का काम 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है.

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मुंबई की दूरी हो जाएगी कम

महू-खंडवा के बीच नए रेल मार्ग के कारण मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर और देश की आर्थिक राजधानी के रूप में मशहूर मुंबई के बीच की दूरी कम हो जाएगी तथा पश्चिमी मध्य प्रदेश का दक्षिण भारत से भी संपर्क मजबूत होगा.

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