सेंट्रल जेल में 40 दिन में 5वीं मौत से हड़कंप; डबल मर्डर के कैदी ने जलती भट्ठी में लगाई छलांग, दर्दनाक मौत

बिलासपुर सेंट्रल जेल में डबल मर्डर के दोषी कैदी राहुल उर्फ विकेश कंवर की गैसीफायर प्लांट की जलती भट्ठी में कूदने से दर्दनाक मौत हो गई. हाई सिक्योरिटी जेल में 40 दिनों के भीतर यह पांचवीं मौत है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

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छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी और हाई सिक्योरिटी मानी जाने वाली बिलासपुर सेंट्रल जेल एक बार फिर चर्चा में है. बुधवार को यहां एक ऐसी घटना हुई जिसने जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. डबल मर्डर के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी ने जेल परिसर में संचालित गैसीफायर प्लांट की जलती भट्ठी में छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हैरानी की बात यह है कि पिछले 40 दिनों में जेल के भीतर यह पांचवीं मौत बताई जा रही है, जिसके बाद लगातार जेल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

डबल मर्डर के मामले में सजा काट रहा था कैदी

मृतक की पहचान राहुल उर्फ विकेश कंवर (46) के रूप में हुई है. वह जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह क्षेत्र का रहने वाला था और डबल मर्डर के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था. वह बिलासपुर सेंट्रल जेल में बंद था और नियमित रूप से जेल परिसर में ही रह रहा था.

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जानकारी के मुताबिक, जेल परिसर में गैसीफायर प्लांट संचालित होता है, जहां लकड़ियों से गैस तैयार कर उसका उपयोग जेल की रसोई में भोजन बनाने के लिए किया जाता है. घटना के समय प्लांट की भट्ठी चालू थी. इसी दौरान राहुल वहां पहुंचा और अचानक जलती भट्ठी में कूद गया. मौके पर मौजूद जेल कर्मचारियों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

सायरन बजाकर घोषित की गई इमरजेंसी

घटना के बाद जेल प्रशासन ने तत्काल सायरन बजाकर आपात स्थिति घोषित कर दी. सूचना मिलते ही कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सेंट्रल जेल पहुंचे. अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पूरे मामले की जानकारी ली. साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल टीम को भी मौके पर बुलाया गया.

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक सजायाफ्ता कैदी गैसीफायर प्लांट जैसे संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्र तक कैसे पहुंच गया. जेल प्रशासन और पुलिस अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि घटना के समय वहां कौन-कौन कर्मचारी तैनात थे और क्या सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर चूक हुई थी. जांच का मुख्य फोकस इसी पहलू पर रखा गया है.

पहले भी विवादों में रही है बिलासपुर सेंट्रल जेल

बिलासपुर सेंट्रल जेल का नाम इससे पहले भी कई मामलों में सामने आ चुका है. जेल के भीतर बंदियों के बीच मारपीट, संदिग्ध मौत, मोबाइल फोन और नशीले पदार्थों की बरामदगी जैसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं. ताजा घटना ने एक बार फिर जेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों को बहस के केंद्र में ला दिया है.

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40 दिनों में पांच मौतों से बढ़ी चिंता

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि पिछले करीब 40 दिनों में बिलासपुर सेंट्रल जेल में यह पांचवीं मौत बताई जा रही है. लगातार हो रही मौतों ने जेल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब इस घटना के बाद जवाबदेही तय करने, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और कैदियों की निगरानी को और मजबूत बनाने की मांग तेज हो गई है. फिलहाल पुलिस, जेल प्रशासन और एफएसएल की टीम पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है.